भारत की प्राचीन धरोहरों में शामिल हैं उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं, जानिए घूमने की पूरी जानकारी

उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं भुवनेश्वर के प्रमुख आकर्षण हैं। भुवनेश्वर से 8 किमी दूर स्थित इन दो पहाड़ियों का वातावरण काफी निर्मल है। उदयगिरि और खंडगिरि में कभी प्रसिद्ध जैन मठ हुआ करते थे। इन मठों को पहाड़ी की चोटी पर चट्टानों को काट कर बनाए गए कक्ष में चलाया जाता था। इन्हीं कक्षों को आज आप गुफा के रूप में देख सकते हैं। ये मठ काफी प्रचीन थे और इसका निर्माण ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में किया गया था। इन में से कुछ गुफाओं में नक्काशी भी की गई है। यहां एक दो तल्ला गुफा भी है जिसे रानी गुंफा के नाम से जाना जाता है। इस गुफा को ढेरों नक्काशियों से सजाया गया है। यहां एक और बड़ी गुफा है, जिसे हाथी गुंफा के नाम से जाना जाता है। उदयगिरि में जहां 18 गुफाएं हैं, वहीं खंडगिरि में 15 गुफाएं हैं।

उदयगिरि और खंडगिरि गुफाओं का इतिहास

भुवनेश्वर शहर में मौजूद इन गुफाओं का इतिहास गुप्त काल से भी प्राचीन का है। इतिहास के पन्नों पर नज़र डालें तो यह प्रतीत होता है कि जैन भिक्षुओं के रहने के लिए इन गफओं का निर्माण किया गया था। एक तरह उदयगिरि गुफा के अंदर में 18 गुफाएं/गुम्फा हैं, तो दूसरी तरह खंडगिरि गुफा में लगभग 15 गुफाएं/गुम्फा हैं। आपको बता दें कि इन प्राचीन गुफाओं की खोज पहली बार 19वीं शताब्दी में एक ब्रिटिश अधिकारी एंड्रयू स्टर्लिंग ने की थी। आज ये गुफाएं और इसके आसपास की जगहें सैलानियों के लिए एक बेहतरीन पर्यटक स्थल के रूप में काम करती है।

उदयगिरि की प्रमुख गुफाएँ

उदयगिरि की गुफाएँ पहाड़ी के दाई और स्थित है जिनमे 18 प्रमुख गुफाएँ शामिल है, उदयगिरि की गुफाएँ खंडगिरि की तुलना में अधिक सुन्दर और बेहतर है। आप जब भी यहाँ आयेंगें तो नीचे दी गई इन गुफाओं को देखे जिन्हें गुम्फा के नाम से जाना जाता है।


रानी गुम्फा

ये गुफा उदयगिरि और खंडगिरि गुफाओं की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध गुफा है, जिसके अन्दर कई प्राचीन और सुन्दर मूर्तियाँ देखी जा सकती है।


बाजघर गुम्फा

बाजघर गुम्फा एक छोटी गुफा है जिसें प्राचीन में जैन भिक्षुओं के आश्रय के रूप में उपयोग किया है। आयताकार आकार की इस गुफा में गंभे और पत्थर का बिस्तर और तकिया है।


छोटा हाथी गुम्फा

यह गुफा हाथियों की छह छोटी आकृतियाँ और एक अभिभावक की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।


अलकापुरी गुम्फा

अलकापुरी गुम्फा एक दो मंजिला गुफा है जिसका मुख्य आकर्षण एक शेर मूर्ति है जो अपने शिकार को मुंह में पकड़े हुए है।


जया विजया गुम्फा

यह गुम्फा भी दो मंजिला गुफा है जिसमे भारी झुमके, बैंड पहने और खूबसूरती से सजाए गए बाल एक महिला की नक्काशी देखने को मिलती है।


पनासा गुम्फा

पनासा गुम्फा एक छोटी गुफा है जिसमे कोई महत्वपूर्ण विशेषता नही है लेकिन फिर भी यह देखने योग्य है।


ठकुरानी गुम्फा

ठकुरानी गुम्फा दो मंजिला है जिसमे कुछ छोटी छोटी मूर्तियाँ मौजूद है जिन्हें आप यहाँ देख सकेगें।


पातालपुरी गुम्फा

यह गुफा खंभों वाले बरामदे के साथ खड़ी हुई है।


मनकापुरी और स्वर्गपुरी गुम्फा

इस गुफा में जिन की पूजा करते हुए दो नर और दो मादा की आकृतियों को दर्शाया गया है, जिसे खारवाल मगध से वापस लाए थे। गुफाओं में जैन धर्म का धार्मिक चिन्ह भी है जो क्षतिग्रस्त स्थिति में है।


गणेश गुम्फा

गणेश गुम्फा उदयगिरि की सबसे महत्वपूर्ण गुफाओं में से एक है। गुफा का नाम इसके दाहिने कक्ष के पीछे गणेश की नक्काशीदार आकृति के लिए रखा गया है। आप जब भी इस गुफा में प्रवेश करने वाले होगें तो हाथियों की दो बड़ी मूर्तियाँ देख सकेगें हैं जो माला ले जा रही प्रतीत हो रही हैं।


जम्बेस्वरा गुम्फा

जम्बेस्वरा गुम्फा उदयगिरि की छोटी सी गुफा है गुफा में मौजूद शिलालेख से अंदाजा लगाया जा सकता है यह महामदे की पत्नी नायकी की गुफा है।


व्याघर गुम्फा

व्याघर गुम्फा उदयगिरि की प्रसिद्ध गुफाओं में से एक है। हालाकि गुफा खंडहर में हैं लेकिन फिर यह देखने योग्य है।


सरपा गुम्फा

सरपा गुम्फा एक असामान्य रूप से छोटी गुफा है जिसमें दो शिलालेख मौजूद है।


हाथी गुम्फा

हाथी गुम्फा उदयगिरि गुफा समूह एक बड़ी प्राकृतिक गुफा है जिसे हाथी की उत्कृष्ट नक्काशी के कारण अपना नाम प्राप्त हुआ है।


धनाघर गुम्फा

धनघर गुम्फा एकछोटी सी गुफा है जिसके प्रवेश द्वार पर दो चौड़े स्तंभ और द्वारपाल की मूर्तियां बनी हुई हैं।

हरिदास गुम्फा

हरिदास गुम्फा में तीन प्रवेश द्वार और सामने की ओर एक बरामदा है। यहां एक शिलालेख भी देखा जा सकता है।


जगन्नाथ गुम्फा

यह गुफा तीन प्रवेश द्वारों वाली गुफा है।


रसुई गुम्फा

रसुई गुम्फा उदयगिरि गुफाओं की अंतिम गुफा है।

खंडगिरि की प्रसिद्ध गुफाएं

जब भी अपनी यात्रा केदौरान आप भुवनेश्वर से इस क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो खंडगिरी पहाड़ियाँ आपके बाईं ओर पड़ेगी जहाँ 15 गुफाएं का समूह है जिनके बारे में हम नीचे बात करने वाले है –

तातोवा गुम्फा

यह गुफा खंडगिरि की गुफाएं की पहली गुफा है। इसके प्रवेश द्वार पर तोतों की नक्काशी उकेरी गयी है जिस वजह से इसे तातोवा गुम्फा के नाम से जाना जाता है।


तातोवा गुम्फा

खंडगिरि की गुफा संख्या 02 को भी तातोवा गुम्फा के नाम से जाना जाता है। इस गुफा में विभिन्न जानवरों और पक्षियों, चैत्य मेहराब, पायलस्टर डिजाइन,नायिका और गंधर्व की चित्रकारी मौजूद है।


अनंत गुम्फा

इन गुफाओं में महिलाओं, हाथियों, गीज़ आदि की मूर्तियां हैं।


तेंतुली गुम्फा

तेंतुली गुफा एक छोटा सा रॉक-कट चैंबर है जिसमें सिर्फ एक कॉलम है।


खंडगिरि गुम्फा

खंडगिरि गुफा दो मंजिला गुफा है जो मोटे तौर पर कटी हुई कोशिका है।


ध्यान गुम्फा

इस गुफा का प्रयोग प्राचीन में जैन भिक्षुओं द्वारा ध्यान के लिए प्रयोग किया गया था।


नवमुनि गुम्फा

नवमुनि गुम्फा नौ जैन तीर्थंकरों और ससाना देवी की मूर्तियों के साथ कटा हुआ कक्ष है।


बरभुजी गुम्फा

इस गुफा में तीन तरफ की दीवारों में तीर्थंकरों के पच्चीस आंकड़े हैं इसके अलावा चक्रेश्वरी को 12 भुजाओं के साथ दर्शाया गया है, जिससे गुफा का नाम बारभुजी रखा गया है।


ट्रुसुला गुम्फा

ट्रुसुला गुम्फा खंडगिरि की गुफाओं की प्रमुख गुफा है जिसमे कायोत्सर्ग मुद्रा में ऋषभ देव की तीन मूर्तियां हैं। इनके साथ साथ इस गुफा में 24 जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां भी हैं।


अंबिका गुम्फा

इस गुफा में तीन मूर्तियाँ मौजूद है जिनमे एक मूर्ति ऋषभनाथ की और एक अमरा नेमिनाथ की आसन-देवी है।


लालतेन्दु केशरी गुम्फा

लालतेन्दु केशरी गुम्फा में ऋषभंथ, और पार्श्वनाथ की तस्वीरें मौजूद है जिन्हें 11वीं शताब्दी में सोमवंशी राजवंश द्वारा गुफाओं में जोड़ा गया था।

इनके बाद की अन्य गुफाएँ अज्ञात हैं।

अन्य जानकारियां

एंट्री फीस

भारतीय पर्यटकों के लिए : 15 रूपये
15 साल से छोटे बच्चो के लिए : फ्री
विदेशी पर्यटकों के लिए : 300 रूपये

कैसे जाये

उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं भुवनेश्वर से 8 किलोमीटर की दुरी पर स्थित हैं। यहां से आप टैक्सी ले सकते हैं। और यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर स्टेशन हैं।